Wednesday, September 23, 2009

LOVE STORY # 391: उस रात कुछ नहीं हुआ. वह बहुत ज़्यादा शराब पीता था

वह बहुत ज्यादा पढ़ी लिखी औरत नहीं थी और सिर्फ पंजाबी में ही लिखती थी. दूसरी भाषाओँ का लिखा वह बमुश्किल पढ़ पाती थी और इसलिए लिखने में कोई बहुत तहजीब नहीं थी. वह बॉलीवुड पर मरी जाती थी. उसके लिए कामयाबी का असली मुक़ाम अपने उपन्यास या कहानियों की फिल्म बनते देखना था. पंजाबी से अंग्रेजी में तर्जुमा होने वाली उसकी पहली नॉवेल पिंजर (द स्केलेटन) थी. ये तर्जुमा मैंने सिर्फ मोहब्बत के नाते किया था. मैंने उस किताब की पूरी रॉयल्टी उसे दे दी इस शर्त पर कि वह अपनी लव लाइफ का पूरा चिट्ठा मुझे तफसील से बता दे. कई बैठकें हुयीं भी. जिस इकलौते इश्क़ का जिक्र उसने किया वह फ़िल्मी गीतकार साहिर लुधियानवी को लेकर था, जिससे वह कभी मिली नहीं थी. पर ख़त ओ खिताबत जरूर हुयी थी. मुझे यह सुनकर काफी निराशा हुयी. मैंने उससे कहा, ' इतनी सी बात तो एक रसीदी टिकट के पीछे लिखी जा सकती है.' बहरहाल जब उसने अपनी आत्मकथा लिखी तो उसका नाम उसने रखा - रसीदी टिकट (हालाँकि रसीदी टिकट में जिक्र है कि साहिर लाहौर में उससे मिला करते थे- एडिटर, आउटलुकइंडिया.कॉम)आखिरकार लुधियानवी से उसकी मुलाक़ात यहाँ दिल्ली में हुयी। उसको उड़ने से डर लगता था, सो वह बम्बई से ट्रेन लेकर पहुंचा. वे क्लारिजेस होटल में मिले, जहाँ उनकी महान प्रेम कहानी को अपने अंजाम तक पहुंचना था. कुछ नहीं हुआ. लुधियानवी बहुत ज्यादा शराब पीता था.
( लेखिका अमृता प्रीतम की मृत्यु पर उनके मित्र खुशवंत सिंह का लेख। इसे श्रद्धांजली कहने में अजगर को संकोच है)

LOVE STORY # 392: फ़ोन पर तैरती हुयी आवाज़ असल की आवाज़ से अलग होती

बहुत सारे अँधेरे खामोश में बीच एक शब्द जैसे एक झील में उछाला हुआ कंकर और डूबने से पहले फिर फिर उछलता हुआ. उस अँधेरे खामोश में आवाज़ का अपना अमूर्त था, अपना जादू, अपना यथार्थ. दूरी की खाई को लांघती हुयी, माइकलएंजेलो की पेंटिंग में बढ़ी हुयी उंगली की तरह. एक लम्बी रस्सी का सिरा पकड़ता हुआ, थमता हुआ, पूछता हुआ उस सन्नाटे की जगह का पता जहाँ उसे उतरना है, अदृश्य की सीढियों से.
वह उस अदृश्य का हिस्सा होती. अदृश्य की अपनी आज़ादी होती. अदृश्य का अपना विन्यास. जैसे जैसा चाहा, वैसा. अँधेरा मखमल बन जाता. खुश होने के लिए ऑंखें बंद हो जाती. आवाज़ अपने मायने उस आज़ाद अदृश्य में गढ़ती. आवाज़ उसे जगाती, छेड़ती. आवाज़ उसके साथ प्यार करती. आवाज़ उसके बिस्तर की सलवटों को पढ़ती. आवाज़ उसे सुला देती. आवाज़ उसके सपनों और स्मृतियों को गड्ड मड्ड कर देती. कभी यहाँ से बुलाती. कभी वहां से. आवाज़ कवितायेँ पढ़ती. आवाज़ एक लम्बा वाक्य कहती. आवाज़ एक लम्बे वाक्य को दुबारा कहती. आवाज़ कई बार एक दूसरे वाक्य को अधूरा छोड़ देती. आवाज़ चुप्पी को ताड़ जाती, उसे समझा लेती, बुझा लेती. आवाज़ उस वाक्य को पूरा करती. आवाज़ उसे पेट से हंसा देती. और कई बार इतनी खामोशी से भर देती कि हाथ बढाकर कांच पर जामे कुहरे की तरह उसे साफ़ करना पड़ता. आवाज़ कई बार शरीर होती, कई बार आत्मा. अक्सर आवाज़ के मायने शब्द के मायनों से अलग होते.
वह हुंकारे भरती. पलट कर आवाज़ देती. नए विन्यास और व्याकरण को रचते. जो आसमान, खामोशी, रात के पहर, अँधेरा तय करता.
फ़ोन पर तैरती हुयी आवाज़ असल की आवाज़ से अलग होती. असल में बहुत सारा शोर होता. ठण्ड, गर्मी, उमस, पसीना, चाँद, बदल, बारिश, अख़बार, दुनिया. असल का एकांत बँटा हुआ होता. असल का ध्यान कई बार भटका हुआ.
वह अँधेरे खामोश में आवाज़ का इंतज़ार करती. खामोश अँधेरे एकांत में आवाज़ का अपना सच था. और असल का अपना. दोनों एक नहीं थे.

Friday, May 15, 2009

LOVE STORY # 393: चाहता है कि वह गलती ज़िन्दगी भर उसका पीछा करे

(मित्र की ही)
लोग उस पहाड़ी पर देवी के दर्शन के लिए चढ़ा करते हैं. लेकिन वो दोनों एक दूसरे के लिए हाँफते हुए सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे. उन्हें नहीं पता था कि ऊपर चढ़ने से क्या होगा. लेकिन उन्हें यह पता था कि ऊपर चढ़ते और उतरते हुए वो दोनों साथ रह सकते हैं. सबसे ऊपर पहुँचकर वे देवी के मंदिर में नहीं गए. थोड़े नीचे एक चट्टान के पीछे बैठ गए. जब साँसें थमीं तो दोनों ने उस चट्टान पर अपना नाम लिखा. चट्टान पर जमी हुई काई पर नाम लिखने में दिक्कत भी नहीं हुई. दोनों को भ्रम न था कि चट्टान पर नाम लिखने से उनका प्यार अमर हो जाएगा या फिर यह नाम कभी नहीं मिटेगा. आधे घंटे बाद दोनों नीचे उतर आए. तब तक सूरज ढल चुका था. वापस लौटते हुए वो जंगलों के बीच पहुंच गए. पहले तो एक दूसरे का हाथ थामे इतने मगन थे कि पता ही नहीं चला. लेकिन जब अंधेरा गहराने लगा और जंगल घना होने लगा तो दोनों को महसूस हुआ कि यह रास्ता ग़लत है.ग़लतियाँ तो हर किसी को सुधारनी पड़ती हैं वरना वो सही किए जाने तक पीछा करती रहती हैं. एक दिन उसने ग़लत रास्ता चुनने की ग़लती सुधार ली. वह अकेला रह गया.उसके बाद से वह उस पहाड़ी पर कभी नहीं गया. उसे यक़ीन है कि उस चट्टान पर जमी काई ने भी अगले मौसम में अपनी ग़लती सुधार ली होगी और नाम मिटा दिए होंगे. सुना है कि अब मंदिर से उतरकर जंगल के उस रास्ते पर कोई नहीं भटकता क्योंकि जंगल विभाग ने वह सड़क ही बंद कर दी है. जंगल विभाग ने भी अपनी ग़लती सुधार ली.लोग उसे कहते हैं कि उसने प्यार करके ग़लती की थी. उसे ऐसा नहीं लगता. अगर वह ग़लती थी भी तो वह उसे सुधारना नहीं चाहता. चाहे तो शायद सुधार भी नहीं सकता. लेकिन वह चाहता है कि यह ग़लती ज़िंदगी भर उसका पीछा करती रहे.प्यार अपनी स्मृति में भी प्यार ही रहता है.

Saturday, April 25, 2009

LOVE STORY # 460- 394: एक ज़िंदगी की एक लाइन में दुनिया भर से 66 कहानियां प्यार की

(धूमिल की एक कविता ऐसे शुरू होती है- ओ अपराध सी अंधी, पाप सी उजागर, आदम इरादों से बित्ता भर ऊपर उठी हुई पृथ्वी. ये 66 कहानियां ट्विटर पर मिलीं. एक ऐसी साइट पर जहां आप अंग्रेजी के 140 कैरेक्टर्स में अपना रहस्य लिख कर उस भार से मुक्त हो सकते हैं, जो आपको खाये जा रहा है. अजगर पहले तो उन्हें एक वोयरिस्ट की तरह पढ़ता रहा, पर जल्द ही लगा कि रहस्य की हर पंक्ति के पीछे एक जीता जागता संसार है, एक जीती-मरती जिंदगी है. चरित्र हैं. 140 कैरेक्टर के विन्यास में न बांटे के दर्द से छुटकारा पाते हुए. जरूरी नहीं कि यहां जो कहा गया, वह सब कुछ सच हो. पर ये आप भी जानते हैं और मैं भी ये सब कुछ झूठ नहीं है क्योंकि हम सब के सच का कोई न कोई हिस्सा इससे मिलता जुलता है. भले ही ज्यादातर लाइनें अमेरिका से हैं. ज्यादातर रहस्य औरतों के हैं. ज्यादातर उलझनें उन फैसलों के बारे में हैं, जहां जिंदगी दुनिया बनने बनाने की देहरी पर कदम रखती है. और ज्यादातर भयावहताएं एक वाक्य में कही जा सकती हैं, भले ही हम उनके लिखने वालों को कभी नहीं जान पाएंगे सिवा एक नंबर के )
36467 अच्छा होता कि मैं अपने पति को कभी न छोड़ती. मैं अपने बच्चों की आंखों में तकलीफ पढ़ सकती हूं. अच्छा होता कि मैं लौट सकती और सब ठीक कर देती.
36538 सबसे बड़ा डर मेरा यह है कि वह जिस शख्स के काबिल है, वह मैं नहीं हूं. मुझे यह खुद को रोज़ बताना पड़ेगा कि मैं वह शख्स बनकर रहूं.
36520 मुझे दस साल लगे अपने एब्यूजिव पति को छोड़ने में. अब वह कसमें खा रहा है कि वह बदल गया है और मुझे वापस चाहता है. आखिर अब न कहने में इतनी दिक्कत क्यों हो रही है.
36428 बीवी, कामकाजी, फुलटाइम स्टूडेंट, पति दूसरी स्टेट में, मुझे न मदद मिलती है न प्यार. भाग जाने के लिए एक सेलिब्रिटी की कल्पना
36423 मुझे बात वहीं खत्म कर देनी थी, जब शादी की रात मेरी बीवी रो पड़ी थी, क्योंकि वह मेरे साथ सोना नहीं चाहती थी. यह 1993 की बात है.
36356 अगर मुझे पता होता कि शादी इस कदर मुश्किल है, तो शादी पैसे के लिए की जाती.
36353 मेरा मंगेतर मुझसे धोखा कर रहा है, मुझे शादी के दो रोज पहले पता चला. मैंने फिर भी उसी से शादी की, क्योंकि मेरा कोई दोस्त नहीं.
36259 बीवी और उसकी सहेली आजकल ज्यादा मिलते जुलते नहीं. मैं असल में भले ही कुछ न करूं, पर मुझे फैंटेसियों से प्यार है.
36198 मेरे पिता का एक सीक्रेट लव चाइल्ड है. मैंने जासूसी कर ये पता लगाया. किसी से नहीं कहा.
36015 मुझे अपनी बीवी से प्यार है, पर मंगलवार की हर रात मैं किसी मर्द के साथ रहता हूं. मैं गे हूं, पर बीवी को नहीं छोड़ सकता.
35948 साल भर पहले मैंने अबार्शन करवाया था. मुझे अभी भी लगता है कि दुनिया में मुझसे बुरा कोई नहीं.
35702 मेरे पति को नहीं मालूम कि मैं अपने थेरेपिस्ट के बारे में सैक्सुअली फैंटेसाइज करती हूं
35589 मेरे साथ रात बिताने का शुक्रिया. खुद को मार डालने का जब मैं मजाक कर रहा था, वह मजाक नहीं था. तुमने मेरी जान बचा ली.
35210 इराक का अपना दौरा खत्म करने के बाद मैं नहीं चाहता कि तुम घर वापस आओ. तुमसे उबरना मेरे लिए जरूरी है और तुम्हारी शक्ल नहीं देखना काफी मददगार होगा.
35176 मैं अपने पति को पोर्नोग्राफी देखने की इजाजत नहीं दे सकती क्योंकि मेरा कहना है कि वह न सिर्फ भद्दा है और फिर औरतों के लिए असम्माननीय भी. पर मैं खुद अकेले में पोर्नोग्राफी देखती हूं.
34969 कई बार चाहता हूं कि मेरी पत्नी मर जाए (चैन से) ताकि मुझे तलाक के कागजों से मुझे उसका दिल न तोड़ना पड़े.
34948 मेरी मां ने अपनी जिंदगी के प्यार को मेरे लिए छोड़ा. अब वह एक नाखुश शादी में तीन और बच्चों के साथ है. मुझे इससे नफरत है.
34896 मेरा पति पोर्नोग्राफी देखता है और मेरा कहीं और चक्कर है. मुझे फिर भी लगता है, उसका धोखा मुझसे बड़ा है.
34804 मेरी नौकरी छूट गई, हम कंगाल हैं और मुझे पता चल गया कि पिछले 6 सालों से मेरा पति मुझसे धोखा फरेब कर रहा था. मैं अपने बच्चों की खातिर खुश रहने का नाटक कर रही हूं.
34725 मैं अपनी बीवी को तलाक दे दूंगा अगर उसने वज़न घटाना शुरू न किया. मैं उसके आलस और मोटापे से थक चुका हूं.
34562 यह लगभग तयशुदा है कि मेरी बीवी मुझसे प्यार नहीं करती.
34201 पहली मुलाकात में तुमने मुझे बता दिया कि तुम इनफर्टाइल हो और मैंने कहा कि मुझे कोई दिक्कत नहीं. पर अब मुझे बच्चे चाहिए.
34195 मैंने अपने पति से धोखा दिया. तब वह अफ़गानिस्तान की जंग में था.
34150 मैंने अबार्शन करवाया, क्योंकि मेरा बॉयफ्रेंड ने मजबूर किया..मुझे तभी पछतावा हुआ. 4 माह बाद वह चल बसा. कम से कम बच्चा तो रह जाता.
34120 मेरे पिता मेरी मां से पिछले 26 सालों से धोखा कर रहे हैं. मैं 29 साल की हूं और वे पिछले 49 सालों से साथ हैं. अच्छा होता वह उन्हें पहले ही छोड़ देती .
33868 प्यार में उस औरत के साथ, जो मेरे प्यार में हैं. शादीशुदा, बाल बच्चेदार, कोई परवाह नहीं.
33552 सोचती हूं मुझे पति से ज्यादा प्यार अपने पपी से है. उसमें कोई दिक्कत नहीं है, पर पपी कितना बेशकीमती है.
33524 जब मेरे बच्चे मुसीबत लगने लगते हैं, तो मैं इनफर्टिलिटी ब्लॉग्स पढ़ती हूं और खुद को फिर भाग्यशाली मानने लगती हूं.
33516 मैं उसे छोड़ना चाहती हूं पर मैं ऐसा करूंगी नही. मैं नहीं चाहती बच्चों को इस सबसे गुजरना पड़े.
33326 मुझे अपनी बीवी से अब बिल्कुल प्यार नहीं. मैं शादी से बाहर आना चाहता हूं, पर मुझे डर अपनी बेटी को लेकर हैं.
33224 हमसे अलग औऱ दूर रह रहे डैड से मैंने कहा कि आई लव हिम, ताकि वे मुझे कार खरीदने का पैसा दे सकें.
33051 मैं कई बार उस पैसे को खर्च करने के तरीकों के बारे में फैटेसाइज करती हूं, जो मेरे पति के मरने पर बीमा वालों से मिलेगा.
32968 मुझे कैंसर है जिसमें 4फीसदी लोग ही 5 साल से ज्यादा बचते हैं. मैं इतना अकेला हूं और शॉवर में खड़ा होकर मैं रोज रोता हूं.
32920 मुझे पक्का पता है मैं प्रेगनेंट हूं. डर इस बात का कि वह मुझे छोड़ देगा.
32848 मैं 31 एफ हूं, जो अभी भी वर्जिन है. मुझे इस बात का गर्व भी है और शर्मिंदगी भी.
32840 बस अभी ही खत्म हुई मेरे पहले प्यार से घंटे भर लंबी बातचीत. वह इराक में है. अभी भी चिंगारियां हैं हमारे बीच. मैं शादीशुदा, पेट में तीसरा बच्चा. उसकी सगाई हो चुकी है.
32824 मुझे मुहब्बत है उससे जिससे मैं कभी कोई संपर्क नहीं रखूंगा.
32777 इस बात से खीझ है कि मुझे इस काल्पनिक चरित्र (एडवर्ड) से ज्यादा प्यार है बनिस्बत खुद अपने बॉय फ्रेंड के.
37971 मैं 27 का हूं. और मेरे सेलफोन कॉंटैक्ट में तीन लोगों के नंबर हैं. एक तो मेरा खुद ही का है.
31565 मैं सिंगल हूं तीन बच्चों को पाल रही हूं. मेरी मां चाहती है मैं शादी कर लूं. पर मुझे बच्चों को बड़ा करना और सिंगल रहना पसंद है.
31465 मेरा पति मेरी जिंदगी का प्यार है. पर कसम से मैं उसके चेहरे पर हमेशा मुझसे शादी करने और बच्चे करने का पछतावा देखती हूं. मैं मर जाती हूं.
31426 मैं रोज रोती हूं क्योंकि मैं खुद को इतना अकेला महसूस करती हूं. मेरे पति को नहीं पता.
30834 मुझे पता था कि तुम खुद को मार डालने वाले हो.. अच्छा होता तुम्हें रोकने के लिए मैंने कुछ और ज्यादा किया होता.. बजाय तुम्हें तुम्हारी जिद पर छोड़ देने के.
30427 मैंने अपने पति को बता दिया कि मैं लेसबियन हूं, ताकि वह मुझसे तलाक मांगना चाहे. कुछ सालों बाद वह हैरत में पड़ जाएगा, जब मैं दुबारा शादी करूंगी.
30409 जिस इंसान से आप दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, उससे बहस जीतना कितना तकलीफदेह और जीत कितनी खोखली होती है.
30268 मैं इस कदर इन दिनों डरा हुआ हूं कि मेरी कुतिया जल्द ही मरने वाली है और पूरी दुनिया वह इकलौती है, जो मुझसे प्यार करती है.
28629 मुझे लगता है कि मुझे अब मुहब्बत में कोई यकीन नहीं रहा. यह बहुत ही तकलीफदेह है.
28619 पिछले दो सालों में हमने एक बार भी बात नहीं कि पर हर दिन मुझे खुद को तुम्हें फोन करने से रोकना पड़ता है. मिस यू.
27554 मैंने अपनी डायरी में झूठ लिखे. मुझे पता था तुम पढ़ोगे जरूर और फिर उसके बारे में बात भी करोगे. बिना अदलबदल किये. अफसोस कि मेरा अंदेशा सही निकला.
27828 मेरे सबसे पक्के दोस्त ने बस अभी अभी कहा कि बजाय मेरे बॉय फ्रेंड के मैं उससे शादी कर लूं. मैं यह सुनने के लिए सात साल से इंतजार कर रही थी.
27977 आज रात मैं अपने पति से चीट करने वाली हूं. और जो अकेली बात मुझे परेशान कर रही है वह ये है कि मैं परेशान क्यों नहीं हूं इस बात को लेकर.
27456 मुझे फिक्र है कि वह मुझसे वफादार नही रहेगा. उसने अपनी बीवी को मेरे लिए छोड़ा था.
26216 दरअसल ये बच्चा उसका नहीं है.
32716 तुम्हारा एक बेटा है. वह खूबसूरत है.
32695 बीती रात अपने बॉयफ्रेंड से जिदकरके ट्विलाइट फिल्म देखने के बाद मैंने उसे एडवर्ड कहकर पुकारा. तब हम बिस्तर में थे.
32640 तुम्हारा दिये हुए डिजाइनर बॉक्स का इस्तेमाल बतौर एश ट्रे हो रहा है :D उम्मीद है तुमसे जल्दी मुलाकात हो ताकि तुम देख सको कि तुम्हारे बिना मैं कितनी खुश हूं.
32536 मैं पेट से थी, जब मैंने पति को एक औरत के साथ पकड़ा. मैंने गुस्से में अबार्शन करवाया और उससे कहा कि मेरा मिसकैरेज हुआ है.
32510 उसने कहा था कि वह मुझसे शादी करने वाला है. ऐसा बोले हुए भी पांच साल बीत गये.
32451 मेरी गर्लफ्रेंड इम्प्लांट लगवाना चाहती है. मुझे वह जैसी है, ठीक लगती है, पर वह मेरी नहीं सुनती. मुझे लग रहा है कि वह दूसरे मर्दों को इम्प्रेस करना चाहती है.
32222 मुझे हमेशा लगता था कि मेरा बॉयफ्रेंड बदसूरत है और मिसकैरेज होने पर मुझे राहत हुई क्योंकि मैं नहीं चाहती मेरे बच्चे की शक्ल उसके जैसी हो.
32176 मुझे अपने परिवार को ये बताने में डर लग रहा है कि मैंने अपने बेरोजगार पूर्व पति को अपने घर में वापस आने दिया.
32146 मेरा बॉय फ्रेंड मेरी आदतें खराब करता है जो कुछ मुझे चाहिए वह सब खरीदकर. अब उसकी नौकरी नहीं रही, मैं उसे डम्प कर रही हूं. चीयर्स!
32109 अपने पीरियड्स आने की खुशी इतनी पहले कभी नहीं हुई, जैसे आज.
32091 पिछले 13 साल से मैं अपनी पत्नी के साथ हूं औऱ उसके प्यार में डूबा हुआ, पर अक्सर मैं दूसरों के बारे में फैंटेसाइज करता हूं, क्योंकि मैं कभी भी किसी और के साथ नहीं गया.
32020 मुझे जिससे प्यार है, वह एचआईवी पॉजिटिव है और मुझे नहीं पता क्या करना चाहिए.
33583 अगर अबार्शन के लिए न गई होती, तो मैं इन दिनों मां बनने वाली होती।

LOVE STORY # 461: नदियों के बीच दूरियां थी, बहाव के बीच नहीं

(उसी मित्र की एक और कहानी)
उनके छोटे से शहर से डेन्यूब नदी बहती थी. वे दोनों डेन्यूब के किनारे ही पले-बढ़े थे. इसी नदी के किनारे वे सपनों और सच से परिचित हुए थे. किसी भी प्रेमी जोड़े की तरह उन्हें नदी अच्छी लगती थी. उन्हें कोई भी नदी अच्छी लग सकती थी लेकिन उनके पास अच्छी लगने के लिए सिर्फ़ डेन्यूब ही थी. अब नदी बहुत प्रदूषित थी लेकिन उसका अच्छापन बरक़रार था. वे जवान हो चुके थे लेकिन नदी से उनका लगाव बना हुआ था. लड़की के माँ-बाप समय के साथ बूढ़े हो गए और फिर बेरोज़गार. हंगरी जैसे देश में जीवन कठिन होता जा रहा था. बहुत संघर्ष के बाद उसने अपना शहर छोड़ने का फ़ैसला किया. डेन्यूब ने कभी कहा नहीं कि मत जाओ. लेकिन उसके प्यार ने ज़रुर कहा कि मत जाओ. उसने डेन्यूब को साक्षी मानकर अपनी कौमार्यता पहले ही उसे सौंप दी थी. लेकिन लड़की के जीवन के लिए यह कौमार्यता और प्यार से थोड़ा बड़ा सवाल था. शायद डेन्यूब से भी बड़ा. इसलिए वह वहाँ से निकल पड़ी. उसने ख़ुद को समझाया. अपने प्यार को भी समझाया कि दूरी से प्यार ख़त्म कहाँ होता है. वह टेम्स के किनारे रहने लगी. बहुत दिनों तक कोशिश करती रही कि टेम्स में कभी अपने प्यार की परछाईं देख सके. कभी वह नदी के किनारे बैठे अपने सुनहरे पलों को याद कर सके. लेकिन उसे निराशा हुई. उसे लगा कि टेम्स को थोड़ा ज़्यादा ग़ुरुर है. ऐसा होता है कि हम अपने शहर-गाँव की नदियों में अपनों को देखते हैं और उसे अपनी जीवन यात्रा का साक्षी मानते रहते हैं. नदी कभी नहीं बताती कि वह क्या सोचती है. हम धीरे-धीरे सभी नदी को एक जैसा भी मानने लगते हैं. लेकिन उसे बाद में पता चला कि सभी नदियाँ एक जैसी नहीं होतीं. डेन्यूब और टेम्स दो अलग-अलग नदियाँ हैं. उधर अपनी प्रिया से बिछुड़ने के बाद लड़के को भी डेन्यूब बदली हुई नदी लगने लगी थी. अक्सर वह नदी के किनारे बैठा रहता लेकिन अब नदी उससे बात नहीं करती थी. बहुत दिनों बाद, एक दिन, लड़की ने टेम्स के किनारे बैठे-बैठे अपने प्यार को याद किया. उस दिन संयोग से लड़का भी डेन्यूब के किनारे बैठा उसे ही याद कर रहा था. अचानक उसने देखा कि टेम्स में उसे अपने प्यार की परछाईं दिखाई दे रही है. उसे यक़ीन नहीं हुआ. उधर उसके प्यार को भी डेन्यूब में अपनी प्रिया दिखाई पड़ रही थी. यक़ीन उसे भी नहीं हुआ. दोनों के लिए यह नई अनुभूति थी. दोनों ने तय किया कि इस अनुभूति को उसकी पूरी गहराई से महसूस करना चाहिए. दो दूर देशों में, एक ही दिन, कुछ मनचलों को दो अलग-अलग नदियों के किनारे दो मोबाइल फ़ोन मिले. उनके सिमकार्ड्स अभी भी डेन्यूब और टेम्स की तली में कहीं बह रहे होंगे. उनके बीच अब संपर्क नहीं होता.
दोनों नदियाँ अब भी भली हैं.

Thursday, April 23, 2009

LOVE STORY # 462: उसके अरमान थे, कुछ मजबूरियां भी थीं, फिर वह सपने देखने लगी, जिन्हें टूटना ही था

(उसी मित्र की भेजी गई एक और कहानी)
वह बहुत ख़ूबसूरत नहीं थी. दोहरा बदन था पर आकर्षक होने के सारे तत्व मौजूद थे. उसे शहर में बहुत से लोग जानते थे. क्यों जानते थे यह बहुत रहस्य की बात नहीं थी. ठीक उसी तरह जिस तरह वासवदत्ता और वसंतसेना की ख्याति रहस्य की बात नहीं थी. ये और बात है कि लोग कहते हैं कि वासवदत्ता और वसंतसेना बला की ख़ूबसूरत थीं. लेकिन ख़ूबसूरती जैसी दुनियावी चीज़ अक्सर दिल और जिस्म के मामलों में बेईमान हो जाती है.
वह जो करती थी वैसा करने के लिए उसके पास अपने तर्क थे. बेरोज़गार, बुज़ुर्ग और विधुर पिता, दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई और वह अकेली कमाने वाली आदि-आदि. उसके पास नौकरी भी थी लेकिन इसी नौकरी ने उसे दूसरा रास्ता भी दिखाया था. उसे इस रास्ते में डालने वाला शहर का एक बड़ा सेठ था.
जो धंधा करते हैं वो जानते हैं कि धंधे में दिल का मामला ख़तरनाक होता है. टाटा, बिड़ला से लेकर मित्तलों और अंबानियों तक यह बात सबको याद रहती है. वासवदत्ता, वसंतसेना से लेकर सुंदरीबाई, मुन्नीबाई और इस लड़की तक को यह बात ठीक से पता थी. लेकिन इतिहास गवाह है कि वसंतसेना ने भी ग़लती की थी और मैं गवाह हूँ कि इस लड़की से भी ग़लती हुई.
वह अब तक पैसों पर सोती आई थी. लेकिन इस बार उसे किसी ने सपनों के बिछौने पर सुला दिया था. पैसा जागने पर बचा रहता था लेकिन सपना, जैसा कि हर सपने के साथ होता है, जागने पर टूट चुका था.
अब कई बरस बीत गए पर उसके सपनों के टूटने की कंपन अभी भी अक्सर महसूस होती है. ख़ासकर उस लड़के के दिल में जो न तब रो सका था और न अब रो सकता है. लड़की पता नहीं अब कहाँ है.

Sunday, April 19, 2009

LOVE STORY # 463: उसने समंदर में बड़े यकीन से वह बोतल फेंकी जिसमे एक ख़त था

वह उस अजनबी को वैसे ही जानती थी, जैसे उसके भीतर एक हिस्से को वह नहीं जानती थी.
उस बोतल में एक ख़त था. वह किनारे पर थी. जब उसने उसे देखा. वह ख़त किसी के लिए भी हो सकता था. पर उसे लगा कि वह उस ख़त का इंतज़ार कर रही थी. उसे लगा जिसने ख़त लिखकर उसे बोतल में भर समुद्र में बहाया है, वह उसे जानती है. हम अजनबियों के एक हिस्से को ठीक वैसे ही जानते हैं, जैसे अपने भीतर के एक हिस्से को नहीं जानते. वह उस खत को अकेले में पढ़ने बैठती है, क्योंकि सिर्फ उसी को पता है कि वह खत उसी के लिए लिखा गया है. नहीं तो क्या जरूरत थी उस बोतल को, कि वह बिना टूटे पानी में डूबती उतराती ठीक उसीके रास्ते आकर पड़ती. उस ख़त में लिखने वाले ने अपने अकेलेपन, अधूरेपन के बारे तफसील से लिखा था और ख़त को पढ़ने वाले को दुआएं दी थी. उसे बार बार लगा कि वह जानती है उसे उसकी बातों से, उसके शब्दों से, दुआओं से, उसके अक्षरों के घुमाव और भूले गये हिज्जों से. वह जानती है उसे उस ख़त में शब्दों के बीच खाली रह गई जगह से. वह जानती है उसे जैसे हम जानते हैं अपने भीतर के किसी को. जिसका हम इंतजार नहीं करते, जिसके लिए हम कोशिश भी नहीं करते, पर जिसके लिए हम हमेशा अपने दरवाजे खुले रखते हैं. ताकि जब वह आये तो न आहट की आवाज़ हो और न दस्तक की दरकार.
बहरहाल उसने उस ख़त को कई बार कई तरह से अकेला होकर पढ़ा. हर बार उसके मन में एक नयी शक्ल का जंगल उग आता, नये तरह के बादल, नये तरह की हवाएं, नये तरह का आकाश.
अपनी दुनिया से छुपकर उसने उस ख़त का जवाब लिखा. कई दिन लगे. जिस अजनबी को वह जानती थी, जो उसका ही हिस्सा था, उसी को अपने मन की बात समझाने की उलझी हुई कोशिश. बहुत संभालकर रखा उस कागज को. बहुत तौलकर लिखा एक एक हर्फ. फिर एक दिन उसे बोतल में भरा, उसकी डाट लगाई और पानी में बहा दिया.
ये काफी हिम्मत का काम था. कोई देख लेता तो. कोई जान लेता तो. कोई पकड़ लेता तो. उस भरोसे का क्या होता, जो उसपर दुनिया ने किया. उसने यह सब पाप की तरह किया, छिपकर. पर जो किया, वह उसके अपने लिए जरूरी था.
समंदर के इस तरफ रेत में कई सारे किले थे. दुनिया थी. पति, बच्चे, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ौसी, जानने वाले सब थे. वह लौट आई सोचकर कि जिसने उसे ख़त लिखा है, उसे उसका जवाब मिल जाएगा. उसे लगा कि इस बहाने वह अपने भीतर के अजनबी से दोस्ती बढ़ा लेगी, उसे लगा बोतल को वापस पानी में फेंक वह अपनी जमीन पर वापस लौट आएगी.
ये तय कर पाना मुश्किल था कि बोतल में भेजा गया संदेश उसके सपने में था, कल्पना में, सच में, सोच में कहां.. ये तय कर पाना मुश्किल नहीं था कि उसने जिया था उस पूरे वाकये को, पल पल बित्ता बित्ता. किसी को पता नहीं था. सिवा उसके. पर वह जहां लौट रही थी, जिस रेत, दुनिया, दिनचर्या, पड़ोस में वहां सब कुछ सामान्य था.
वह असहज तौर पर सामान्य होने, दिखने की कोशिश कर रही थी. हालांकि इससे भी किसको फर्क पड़ता था.