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लोग मर गये. बदहवासी का आलम कुछ इस कदर फैला कि देखते देखते इमरजेंसी लग गई. एक हारते हुए जनरल और कुछ अकड़े हुए न्यायाधीशों के बीच हो रही इस अफरातफरी में पीपीपी की नेता बीबीबी (
बेग़म बेनज़ीर भुट्टो)
का मेकअप तक नहीं बिगड़ा.
और अपनी जमीन पर आठ साल बाद इतनी धमाकेदार एंट्री नहीं हो सकती थी.
कुछ ही घंटे हुए थे बीबी को पाकिस्तान पंहुचे हुए.
कुछ ही मिनट हुए थे बख्तरबंद गाड़ी का ढक्कन बंद किये हुए.
और अब इमरजेंसी के परदे में लोकतंत्र पाकिस्तान में वापस लाया जा रहा है,
पिंजरे में आजादी की तरह.
और जॉर्ज डबल्यू और कोंडी इस बारे में अपने बोर्ड ऑफिस चिंताओं से दुनिया को अवगत करा रहे हैं.
लंदन के टेलिग्राफ में एक तलाकशुदा जोड़े (इमरान और जेमिमा ख़ान) ने बेनजीर के बारे मे अपनी राय लिखी है, जिससे मुताबिक एक तानाशाह जनरल से सांठगांठ कर बीबी पाकिस्तानी इस्टैबलिशमेंट को एक ऐसा मुखौटा उधार दे सकती हैं, जिसमें ऑक्सफोर्ड का लहजा, औरत का ब्यूटी पार्लर लावण्य, कट्टरपंथियों से परहेज और शासक वर्ग का दबका शामिल है. ये अमेरिका से लेकर पाकिस्तानी इस्टैबलिशमेंट के नाम से मशहूर फौजी, जमींदारों और अमीरों के शासक वर्ग को सूट करता है. अदालतें कुछ अकड़ दिखला रही थी, उन्हें एक झटके में ठीक कर दिया गया. आखिर वह कौन होते हैं पाकिस्तान का भला चाहने वाले. मियां नवाज शरीफ पता नहीं दुबई या लंदन में हेयर ट्रांसप्लांट करवाने के बाद भी इसमें शायद किसी को मुआफिक नहीं गुजरते. क्या यह अमेरिकी इशारों पर हो रहा है, ये समझ पाना बहुत मुश्किल नहीं है. बेनजीर ने मुशर्रफ के साथ होकर खुद को एसेसिनेशन का निशाना बनाया है और उसकी दिक्कतें कम नहीं होने वालीं, ये कहना है इमरान खान का। कल जो नवाज शरीफ का तख्तापलट कर रहा था, आज अपना तख्ता बचाने के लिए बीबी के आगे दुहरा हुआ जा रहा है.
मतलब फरेब किस कदर है. सभी झूठ बोल रहे हैं. सभी का इस झूठ में हित है. लोकतंत्र की इस गा़ड़ी में सवार लोग अपने सामान के लिए खुद जिम्मेदार हैं. आज बेनजीर को रैली पर निकलने से पहले ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया. फोन पर वह जिस तरह की चाशनी आवाज में इमरजेंसी और मुशर्रफ का जिक्र करती हैं, तो उनकी साउंड लैग्वेज (पाकिस्तान में औरतों की बॉडी लैंग्वेज के बारे में बात करना मना है, वैसे भी बेनजीर टीवी पर अपनी आवाज सुना रही थीं) से उनकी खुशी साफ झलक रही थी. इस खुशी की कितनी सारी वजहें हैं. एक तो वे अकेली मैदान में हैं इसिलए उनका जीतना आसान है. उन पर भ्रष्टाचार के आरोप जो थे, अब वापस लिये जा रहे हैं. उनके पति आसफ अली जरदारी यानी मिस्टर टैन परसेंट को फिर से छूट होगी लूटने की. नवाज शरीफ शायद चुनाव के बाद भी पाकिस्तान से बाहर रहेंगे. नये जज और इस्टैबलिशमेंट बेनजीर के पक्ष में रहेंगे. अमेरिका और पश्चिम के देश भी. बेनजीर उनके हाथ में कठपुतली होंगी और वे बेनजीर के थोड़े मोड़े लालच की तरफ से पीठ कर लेंगे. और सब कुछ अवाम के नाम पर.
सिंध प्रांत के दूसरे कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी हैं जो हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री बनने ही वाले हैं, ऐसा यकीन करने वालों की कमी नहीं. बेनजीर की तरह उनकी 'रथयात्रा' ने भी काफी तबाही मचाई थी. कल किसी ने नंदीग्राम को जैसे ही किसी बुद्धिजीवी टाइप ने गुजरात और बुद्धदेव को नरेंद्र मोदी बताया तो वे आज बंगाल पंहुच गये सुषमा स्वराज के साथ और कहने लगे राज्य सरकार ही लोगों को मरवा रही है. अब ये ममता या दूसरे लोग कहें तो समझ में आता है. पर नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े हिमायती बनने वाले और तहलका एक्सपोज के बाद से मुंह में दही जमा कर बैठे लालकृष्ण आडवाणी इस तरह की बात बोलने लगते हैं तो समझ लीजिए कि आडवाणी छाप हिंदुत्व के छद्म के पीछे मूल्यों और नैतिकता की किस कदर मिलावट है. क्या मिलावट दक्षिणपंथ और इन दो सिंधी नेताओं का मूल गुण है?
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