Sunday, September 28, 2008

LOVE STORY # 498: बहुत एहसान है उनका मुझपर जिनसे मुझे मोहब्बत नहीं

शुक्रिया: नोबेल से सम्मानित पोलिश कवि वास्लावा शिम्बोर्स्का

बहुत एहसान हैं उनका मुझपर
जिनसे मुझे मोहब्बत नहीं
बहुत राहत है कि वे ज्यादा प्यारे हैं
किसी और को
इस बात की खुशी कि मैं
उनकी भेड़ों के बीच छिपा हुआ भेड़िया नहीं
उनके साथ मैं शान्ति से हूँ
उनके साथ मैं आजादी से हूँ
और ये दोनों बातें
मोहब्बत न दे सकती है
न बर्दाश्त कर सकती है
मुझे उनका इंतज़ार नहीं करना पड़ता
खिड़की से लेकर दरवाजे तक चहलकदमी में
सूर्य घड़ी की तरह संयमशील
मुझमें वह समझ है जो मोहब्बत में नहीं
मैं उसे माफ़ कर सकती हूँ, जिसे प्यार कभी माफ़ नहीं कर सकता

मुलाक़ात से चिट्ठी के दरमियाँ
कोई युग नहीं बीतता
बस कुछ दिन और हफ्ते ही तो

उनके साथ सफर हमेशा ही कामयाब रहे
कंसर्ट सुने गए
गिरिजाघर घूमे गए
उनके साथ
नज़ारे हमेशा साफ़ रहे
अंग्रेजी से अनुवाद : आस्तीन का अजगर

6 comments:

Beji said...

सच !!

kc said...

jinke saath nazare dekhe,
unse muhabba ho gayee
yak ba yak

Anonymous said...

Dard ho raha hai.Man karta hai ke sab se kha du ki mat karo moohabbat mujse.

ravindra vyas said...

badhiya! pyari kavita!

anubhuti said...

bahut hi ytharthvadi kavita hai jisne bhe kabhi pyar kiya hoga usk dil ko chu legi

anjani mishra said...

ye kavita dil ko chhoo gayi.......