हरा कोना रचनाधर्मी पत्रकार रविंद्र व्यास का ब्लॉग है और ये कहानी उन्होंने अपने ब्लॉग पर अजगर को समर्पित की है. आस्तीन का अजगर उनका आभारी है और खुशबुओं की तरह यह सुंदर कहानी उनसे इज़ाजत लेकर प्रकाशित कर रहा है. इसी बहाने अजगर यह साबित भी करना चाहता है कि यहां जो कुछ लिखा हुआ है, उसका अपना और भोगा हुआ नहीं है. ये सिर्फ कोशिश है प्यार के फिल्टर से दुनिया को देखने की. अगर आपने भी दुनिया को ऐसे देखा हो और कुछ दिलचस्प दिखाई दिया हो, तो इस ब्लॉग में उसका स्वागत है. अगर आप चाहेंगे तो नाम के साथ, नहीं चाहेंगे तो नहीं भी. पर कहे जाने की नियति से बचा रह गया प्रेम हमारी मनुष्यता में मुक्त कैसे हो सकेगा ;-) रविंद्र व्यास की कहानी -
वे कॉलेज के चमकीले दिन थे और हमेशा की तरह वह सीढ़ियां गिनते हुए चढ़
रहा था। जब वह सातवीं सीढ़ी पर था, एक लड़की उसके पास से बहुत तेजी से उतरी। बेफिक्र और बेपरवाह। उसकी पीली चुन्नी उसे छूते हुए निकल गई। वह उसी सीढ़ी पर थोड़ी देर के लिए खड़ा रह गया, अवाक्। उसने महसूस किया, उसके सीने के बाईं ओर कहीं उस चुन्नी का पीला रंग छूट गया है जो धडकनों के साथ मिलकर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया है। उसने एक गहरी सांस ली और पाया कि सांसों में खुशबू बसी है। उस लड़के को पहली बार यकीन हुआ कि दुनिया में जादू भी होते हैं।
रहा था। जब वह सातवीं सीढ़ी पर था, एक लड़की उसके पास से बहुत तेजी से उतरी। बेफिक्र और बेपरवाह। उसकी पीली चुन्नी उसे छूते हुए निकल गई। वह उसी सीढ़ी पर थोड़ी देर के लिए खड़ा रह गया, अवाक्। उसने महसूस किया, उसके सीने के बाईं ओर कहीं उस चुन्नी का पीला रंग छूट गया है जो धडकनों के साथ मिलकर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया है। उसने एक गहरी सांस ली और पाया कि सांसों में खुशबू बसी है। उस लड़के को पहली बार यकीन हुआ कि दुनिया में जादू भी होते हैं। उसे ध्यान आया कि वह उस लड़की का चेहरा नहीं देख पाया। यही सोचकर वह पलटा तो उसने देखा वहां एक खाली और सूना गलियारा है और सन्नाटा पसरा हुआ है। सातवीं सीढ़ी पर खड़ा होकर वह सोचने लगा कि उसी लड़की के साथ सात जनम की कसमें खाएगा, सात फेरे लेगा और कभी भी उससे सात समंदर दूर नहीं जाएगा।
उसके दिन बदल गए। उसकी शामें बदल गईं। उसकी रातें बदल गईं। उसकी करवटें औऱ सलवटें बदल गईं। उसकी धड़कनें और सांसें बदल गईं। फिर उसकी आदतें बदल गईं। वह एक नई और अजीब-सी आदत का शिकार हो गया। वह उसके पास से गुजरने वाली हर लड़की को बहुत ध्यान से देखता। और उस लड़की को तो वह बहुत ही ध्यान से देखता जिसने पीली चुन्नी डाल रखी हो। जब भी कोई लड़की उसके पास से गुजरती वह रुककर गहरी सांस लेने लगता। इस आदत की वजह से कई बार कई लड़कियां उसे संदेह की निगाह से देखतीं। कुछ बिचकतीं, कुछ सहमतीं। कुछ रास्ता बदल लेतीं।
मौसम बदलते हैं। रिमझिम बारिश होती है, गुलाबी ठंड पड़ती है और बसंत आता है और पीले फूल खिलते हैं।
फिर एक दिन ऐसा आता है कि वह उसकी क्लास की ही एक लड़की की शादी में अपने दोस्तों के साथ जाता है और लडकी को शादी की बधाई देते हुए हाथ मिलाता है तो सीने के बाईं ओर एक पीला रंग और पीला होकर चमकने लगता है और धड़कनों के साथ घुलमिल कर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया जाता है। वह उस लड़की के पास थोड़ी देर खड़ा रहता है, फोटो खिंचवाता हुआ। गहरी सांस लेता है, तो पाता है कि उसकी सांसों में खुशबू बसी है और वह अपने कॉलेज की उसी सातवीं सीढ़ी पर खड़ा है, अवाक्, जहां एक लड़की की चुन्नी का पीला रंग उसके दिल पर छूट गया था।
चारों तरफ चहल-पहल है, लोग एक-दूसरे से हंसते-खिलखिलाते मिल रहे हैं, संगीत बज रहा है लेकिन वह लड़का अब भी सातवीं सीढ़ी पर खड़ा होकर फिर से सोचना चाहता है कि वह उसी लड़की के साथ सात जनमों की कसमें खाएगा, सात फेरे लेगा और उससे कभी भी सात समंदर दूर नहीं जाएगा...




3 comments:
वह उसी लड़की के साथ सात जनमों की कसमें खाएगा, सात फेरे लेगा और उससे कभी भी सात समंदर दूर नहीं जाएगा...
" ............... very sensetive, enjoyed reading it"
Regards
यहां भी, इस सार्वजनिक मंच पर मैं आस्तीन का अजगर के प्रति गहरा आभार प्रकट करता हूं कि यहां से होकर मैं और और जगहों पर पहुंचा हूं शायद।
bahut......bahut....bahut hi achchha... dhanyavad.....kahani sochane ko mazboor to karti hi hai .....dil ke kisi kone ko BHAREE bhi kar deti hai....AISA ...once in a...? hi hota hai..............
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