
उसने कहा उसे लौटना है. उसने पूछा कहाँ? उसने कहा - अब उसे पता है रास्ता ख़ुद के पास जाने का. उसने कहा अब वक्त आ गया है कि थोड़ा अकेले हुआ जाए, ख़ुद के साथ. एक आलाप में, ध्यान में, कविताओं के सफ़ेद में. कई बार जब वह अपने में डूबने लगती तो उसे लगता कि वह लौटेगी नहीं, अपने उस होश हवास में जहाँ बाकि दुनिया है. कई बार वह अपने भीतर की ऊँचाई से नीचे देखती तो सब ठहरे हुए साफ़ पानी की तरह इतना पारदर्शी नज़र आता जैसे सिक्के चमकते नज़र आते हैं गहरे में साफ़. कई बार अवरोह पतंग की तरह बहुत ऊपर ले जाता, उसे डर लगता कि उस जगह पर लौट पाना मुमकिन होगा, जहाँ से चले थे. प्यार उसे अपने करीब ले आया था. एक तरह से वह ख़ुद के पास लौटना तो था, पर वापस आना नहीं था. क्योंकि वह जो थी, वह वैसी नहीं थी, जैसा लौटने से बहुत पहले हुआ करती थी. प्यार ने उसे जो खुशी दी थी, उसने उसे बदल कर रख दिया था सिरे से. वह भीतर से खूबसूरत हो गई थी, और बाहर जो दीखता था, वह तो सिर्फ़ झलक थी उसके भीतर के सौंदर्य की. अब जब वह भर गई थी, खुश थी और ख़ुद को इतना खूबसूरत महसूस कर रही थी कि वह अपनी ज़िन्दगी के, नियति के, दुनिया के बहुत से अधूरे अध्यायों को नज़रंदाज कर सकती थी. उसके पास जो इस समय था, उसमे वह पूरी थी. और ये बड़ी बात थी. क्योंकि दुनिया उसकी ज़िन्दगी को नहीं, उसकी ज़िन्दगी उसकी दुनिया को तब्दील कर रही थी. उसका अपने पास लौटना प्यार से दूर जाना नहीं था. खुशी को जिस चश्मदीद गवाह की दरकार थी, वह प्यार था. जिसके साथ वे जहाँ भी गए, हर बार नई जगह, नए रास्ते, नए हालातों में पहुंचे. इसलिए लौटना हर बार वापस होना नहीं हुआ.
photo: solitude by m4gic/ flickr




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दीप मल्लिका दीपावली - आपके परिवारजनों, मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ दीपावली एवं नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
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