Tuesday, October 21, 2008

LOVE STORY # 489: उसने दरवाजे की चौखट पर खड़े होकर कहा वह कहीं नहीं जायेगी

वह दरवाज़े की चौखट पर खड़ी थी. उसने उसे छुआ. और भरोसा दिलाते लहजे में कहा- मैं कही नहीं जा रही. दरअसल वह जाने की कोशिश कर के देख चुकी थी और हार मान चुकी थी. ये कोई फ़ैसला नहीं था. जानकारी थी कि वह कहीं नहीं जा रही. ये जानकारी वह उसके साथ साझा कर रही थी बाकी सारे सचों की तरह. उसकी अपनी गहराई थी, जो बढ़ती जा रही थी. लगता था किसी दिन वह डूब जायेगी अपने ही भीतर, अपनी ही गहराई में. अपने भीतर के छलकते लबालब भरे हुए एहसास से.
वह ख़ुद से बचना चाहती थी.
मैं जानता हूँ, उसने कहा. तुम कहीं नहीं जाओगी. पर वह उससे ये सुनना नहीं चाह रही थी. शायद वह उससे सुनना चाह रही थी कि वह भी कहीं नहीं जाएगा. शायद हम सब जो कहते हैं वही सुनना भी चाहते हैं. उसी में गूंजना चाहता हैं. वह सोचती थी कि वह भी उसे भरोसा दिलाएगा उसे कि तुम कहीं भी चली जाओ, मैं कहीं नहीं जा रहा. मैं यहीं हूँ तुम्हारे साथ. हमेशा.
पर उसने ऐसा कुछ नहीं कहा. और इसलिए वह ग़लत था.
उसे पता था कि वह चला जाएगा. जाना तो उसे था ही. आख़िर उसकी एक दुनिया थी. डर थे, जो उसके वर्तमान से बड़े थे.
देहरी पर खड़ी होकर वह सोच रही थी कि उसने जो कुछ भी चाहा था, वह चला गया था. एक दिन प्यार चला गया था उसकी दुनिया से, वह पत्थर हो गई थी, सारे स्वर छोड़ गए थे उसे. उसे डर था कि एक दिन उठेगी और शब्दकोष के सारे शब्द उसे छोड़ कर चले जायेंगे.
अगर वह चला गया तो.
वह दरवाजे कि चौखट पर खड़ी रही. उसे मालूम था कि वह चला जाएगा. उसका डर ऐसे न बदलने वाला सच था, जिसमे जाना तैशुदा लकीर की तरह था. बाकी सब बेहलावा था.
वह चला गया. इस भरोसे से कि वह कहीं नहीं जायेगी. दरवाज़े की चौखट पर उसे अन्यमनस्क छोड़.
photo: rusty hinge and face/fd

3 comments:

makrand said...

सारे स्वर छोड़ गए थे उसे. उसे डर था कि एक दिन उठेगी और शब्दकोष के सारे शब्द उसे छोड़ कर चले जायेंगे.
bahut sunder laghu katha
regards

वर्षा said...

सुंदर कहानी

poemsnpuja said...

kamaal ka likhte hain aap. jadoo si bahti hai kahaniyan. aapka link apne blogroll me daal rahi hun.