
कई बार आंसू दिखाई नहीं देते. वे हर बार दुख के भी नहीं हो पाते. कई बार खुशी के भी नहीं. कई बार वे उस वक़्त धोखा दे जाते हैं, जब दुनिया, जमाना और यहां तक कि आपके चाहने वाले भी अपनी शक्लों पर ये उम्मीद की तख्ती टांगे होते है. कई बार किसी लम्बे सफर में बिना किसी उकसावे के, कई बार कोई सदियों पुराना भजन सुनते हुए, कई बार किसी के दिवंगत हुए के अरसे बाद वे आते हैं.. अनामंत्रित साधुओं की तरह, कई बार दान के लिए नहीं, सिर्फ आत्मा को आकाश और ऱौशनी और पानी देने के लिए. कई बार टीस की तरह चुभते और पत्थर की तरह दुखते भार को हल्का करने के लिए भी.
कई बार आंसुओं को बहता हुआ महसूस किया जा सकता है, देखा नहीं. तूफान के बाद की तबाही फैले हुए काजल और भर्राते हुए गले में पढ़ी जा सकती है. कई बार प्रार्थना कहे जाने के लिए किये गये अकस्मात अनुष्ठान के बाद के यज्ञ स्थल की तरह.
कई बार बिना मन्नत की इबादत की तरह. बिला वजह गाने, जीने, मुस्कुराने, मरने, सांस लेने की तरह.
फोटोः आईज - डेड्रीमर फ्लिकर




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