ज्यादा कुलचे खाने की खुशी एक उदास चेहरे में मॉर्फ हो जाती है. अमृतसर खुशियों का शहर है. वहां हर आदमी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा मोटा, बड़ा और कम पिलपिला है. अमृतसर को कुलचों से प्यार है. और दुनिया में कुलचे खाने वालों की राजधानी अगर कहीं हो सकती है तो वह अमृतसर ही है. अमृतसर ने अगर बाबा रामदेव की उद्भट योग कला को अपनाया है, तो सिर्फ इसलिए कि अगली बार बिना उदास हुए एक कुलचा और खा सकें. जो लोग कुलचों से प्यार करते हैं, वे इंसान के प्यार को अपनी खट्टी और तेज़ाबी डकारों के बीच कह देते हैं- कल आना।
फोटोः चार्ल्स हेन्स फ्लिकर




3 comments:
काफी स्वार्थी और भौतिकवादी लोग हैं
अरे, भाई , यह क्या आज रविवार की सुबह सवेरे आपने मेरे यह अमृतसर के खाने पीने के बारे की बातें कर के मेरे पुराने जख्म हरे कर दिये।
मैं अमृतसर का ही रहने वाला हूं....वहां का ही जनम है और 28साल वहीं बिताये हैं--इसलिये अमृतसर की गली गली में सजी खाने पीने वाली दुकानों को अच्छी तरह से जानता हूं.
मुझे लगता है कि आप भी अमृतसर से ही होंगे ..अच्छा लगा।
बहुत बढ़िया फोटो ...लेकिन यार, नान के साथ छोले नहीं दिखे। अगली बार ध्यान रखियेगा।
Wah wah...kya pyaar hai! M awestruck by ur observation.
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