Saturday, October 11, 2008

LOVE STORY # 493: वे इतना ही चाहते थे कि किसी एक को पता हो उनके बहुत अकेले होने का

कॉफी हाउस के बाहर कॉफी की गंध थी. कॉफी के प्याले से ज्यादा. वह हमेशा कहता था, कि यह गंध ग्राहकों को पटाने के लिए है. कॉफी का वह तेज़ भभका जो दुकान से निकलता है और याददाश्त की कल्पना को झकझोर देता है, वह तलाश प्याले के सच से पूरी नहीं होती.

वे वहां कॉफी पीने नहीं, मिलने आते थे. समय और दुनिया से बाहर खुले में बैठने की थोड़ी जगह चाहिए थी.
वह तभी तभी दुनिया की सबसे अकेली इंसान बनी थी.
वह हमेशा अकेलेपन के साथ होना चाहता था.
एक अनुष्ठान की तरह सब तय था. एक कैपिचैनो, एक ब्लैक एस्प्रेसो. मशीन से बिल निकलने की आवाज़. काउंटर पर सेल्समैन की बोरियत भरी मुस्कान. दीवार पर जॉज संगीतज्ञों की तस्वीर.
भाप. बातें. उत्तेजना. बहस. एक अनुष्ठान की तरह वे एक ऐसी दृश्य में थे, जिसे पेंट किया जा सकता था. फ्रेम दर फ्रेम. इतनी साफ, साबुत और ज़िंदा कि आप अपना हाथ बढ़ा कर उसे छू सकते थे. अगर नहीं छूते तो सिर्फ इसलिए कि आप जादू को टूटने नहीं देना चाहते थे. जैसे आप चांद को देखकर उसे सहेज लेना चाहते हैं. जहां वह दुनिया की सबसे अकेली इंसान थी. और वह अपने अकेलेपन के साथ.

वे चाहते थे किसी एक को तो ये बात पता हो।

पेंटिंगः वुमेन स्मेलिंग कॉफी- गिजेम सका, तुर्की

1 comments:

tangerine toes said...

heart is a lonely hunter ..