Friday, October 3, 2008

LOVE STORY 495: सबसे महानतम कवियित्री की खुदकुशी के बाद उसकी मां को भेजा गया उसके पति का ख़त


सिल्विया प्लाथ (1932- 1963) अमेरिका और दुनिया की सबसे मजबूत और गहरी स्त्री आवाजों में से शायद सबसे महत्वपूर्ण हैं. उनके पति टेड ह्यूज (1930-1998) के ख़त हाल ही में किताब बनकर आए हैं. ये ख़त सिल्विया की आत्म हत्या के बाद टेड ने अपनी सास को लिखा है.

(प्लाथ के हाथ की लिखी हुयी ये कविता )

15 मार्च 1963

टी एस लिली लाइब्रेरी

प्रिय औरेलिया
मेरे लिए इससे पहले ये चिट्ठी लिखना मुमकिन नहीं था. बच्चों की देखभाल के लिए नैनी है और जीन की दोनों बच्चों फ्रीदा और निक से अच्छी बन रही है. निक के साथ तो उसका लगाव काफ़ी है। जितना मुझे अंदाजा था, वह उससे कहीं ज्यादा बेहतर साबित हो रही है। पहले वह थोड़ा संकोच करती थी पर अब वह सहज हो गई है. वह डोरसेट इलाके के किसी कोस्टल गाँव से है और उसमें वह शांत प्रवृत्ति और पक्कापन है, जो खुली जगहों में रहने वाले गैर शहरी लोगों में होता है. निक पहले जैसा ही है. डगमग चलता है और कुछ अजीब से शब्द बोलता है. फ्रीदा अब लंबे वाक्य बोलने लगी है और अब लगातार बात करती रहती है. वह अब पहले से बहुत कम स्वार्थी हैं और शांत होने लगी है. जब घर में मेहमान आते हैं तो उनसे चीजें छीन कर निक के पास ले जाती है. मेरे ख्याल से जीन की तरह शांत इंसान साथ होने में कोई बुराई नहीं है. उसके लिए भी हमें छोड़ना अब काफी दर्दनाक होगा.


मैं इस सदमे से कभी उबार नहीं सकूँगा और न ही मेरी ऐसी कोई मंशा है. सिल्विया ने जो ख़त मेरे मां-बाप को लिखे हैं वे मैंने देखे हैं और मेरा ख्याल है उसने आपको भी ऐसे ही या इससे भी बुरे ख़त लिखे होंगे. हमारी शादी के हालात, असामान्य थे, क्योंकि हम दोनों अपने गहरे मनोवैज्ञानिक विकृतियों के शिकार थे. मतलब यही था कि हम दोनों एक दूसरे को ऐसी हालात में काबू करना चाहते थे, जहाँ से हमारी हर हरक़त और सामान्य सोच भी पागलपन दिखलाई देती. शुरू से आखिर तक शादी को ठीक करने की मेरी कोशिश एक पागलपन थी. जिस तरह से उसने मेरी हरकतों पर अपनी प्रतिक्रिया जताई वह भी एक तरह का पागलपन ही थी- चाहे तलाक़ की जिद, जो उसे चाहिए ही नहीं था, दंभ से भरी नफरत और घृणा और उसी तरह की हरकतें. शायद वह ऐसा इसीलिए कर रही थी, कि अगर मैं उसके पास वापस नहीं गया, तो वह जिंदा नहीं रह पायेगी. सिर्फ़ आखिरी महीने में हम दोस्त हो गए, इतने करीब तो हम पिछले दो साल में कभी भी नहीं थे.

सब कुछ ठीक होने लगा था और हम फ़िर से कुछ अच्छा वक्त साथ बिताने लगे थे. तभी उसके पहले ब्रेक डाउन के बारे में उसकी किताब आई और यकायक पचासों अलग अलग बातें उसके ख़िलाफ़ खड़ी हो गयीं, वह उत्तेजित होने लगी, मुझसे भीख मांगने लगी कि मैं कहीं और चला जाऊँ क्योंकि उसे गवारा नहीं था हम एक ही शहर में रहें, मेरी मौजूदगी उसकी आज़ादी को कमज़ोर कर रही थी वगैरह.. फिर यकायक भारी सीडेटिव्स और फ़िर ये. अगर main उसके साथ संघर्ष में इस कदर अँधा और फंसा हुआ न होता तो कितनी आसानी से ये सब देख सकता! और मैं उस मुकाम तक पहुँच गया था, जहाँ से मुझे लगता था कि हम अपनी शादी को बचा सकते हैं. वह तलाक़ की जिद छोड़ने को तैयार हो गई थी. उस वीकएंड मैंने अगले पखवाड़े के सारे अपोइन्टमेंट कैंसल कर दिए थे. मैं उसे सोमवार को बुलाने वाला था छुट्टी पर किसी ऐसे बीच पर जाने के लिए, जहाँ अभी तक हम नहीं गए थे. सोचिये मेरे लिए भी ये सब कैसा रहा होगा.

हम पूरी तरह से अंधे, हम दोनों दम्भी, बेवकूफ और तनावग्रस्त थे. हमारे अभिमान ने हमें एकदम अपारदर्शी बना दिया था, खास तौर पर उसे. मुझे पता था सिल्विया ऐसी ही बनी थी... कि अपने सबसे प्यारे लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ देने वाली, पर हर कोई थोड़ा बहुत ऐसा ही होता है और मुझे उसकी इस बात से निपटने के लिए थोड़ा दिमाग से काम लेना चाहिए था.

सतह पर हमारे रिश्ते वैसे ही थे जैसे अलग हो रहे सामान्य जोडों के होते हैं, दरअसल उनसे बेहतर भी क्योंकि उसके पास पैसे थे, नाम था, भविष्य कि योजनायें थीं और दोस्त थे. पर शायद इन्ही वजहों से हमारे बीच समझौता टलता रहा.
मैं नहीं चाहता मुझे माफ़ कर दिया जाए. मेरा मतलब यह नहीं कि मैं उदासी और पश्चाताप कि कोई सार्वजनिक मूरत बन जाऊँ, मैं इसके बिल्कुल ठीक उल्टा बनूँगा. पर अगर कहीं अमरत्व है, तो वहां मैं सबसे मुश्किल में रहूँगा. सिल्विया सबसे महानतम और सबसे सच्ची आत्माओं में से एक थी और अपने आखिरी महीनों में वह एक महान कवि बन चुकी थी और एमिली डीकिनसन के अलावा किसी और स्त्री कवि से उसकी तुलना भी नहीं की जा सकती और कोई भी जीवित अमेरिकी तो इस लायक ही नहीं.

तो अब मैं फ्रीदा और निक की देख भाल करूँगा और आप उसके लिए कतई फिक्रमंद न हों. जितना ज्यादा हो सकेगा मैं उनके बारे में लिखता रहूँगा. फ्रीदा अभी स्कूल गई हुयी है - वह सुबह उठते ही स्कूल जाने का शोर मचाने लगती है, और वहां वह काफी अच्छे से घुल मिल रही है. उसके दो पक्के दोस्त भी बन गए हैं. जीन इस वक्त निक को सुला रही है. नैनी सारा काम करती है और हफ्ते के सिर्फ़ 6 पाउंड लेती है. हफ्ते में डेढ़ दिन वह छुट्टी करती है.

मैं नहीं जानता था इस ख़त को कैसे शुरू करुँ और अब ये समझ नहीं आ रहा कि ख़त्म कैसे करुँ। मैं फिर लिखूंगा आपको अपने आगे के प्लान बताने के लिए.


प्यार

टेड


1 comments:

Anonymous said...

aap ko nahi lagta kai khat hamari jindgi ke ird gird bas isi tarah hoten hain bas hamare paas unhe kahne ke liye shabd nahi hote,is khubsurat khat ko padhane ke liye shukriya