Sunday, November 30, 2008

LOVE STORY # 474: मुंबई की मुजाहिदीन शाम में उसे बामियान बुद्ध को उड़ाने के बाद की खाली जगह याद आई

मुंबई में जब वह धमाकों के बीच भाग रही थी, उसका चेहरा पीछे छूट चुका था.उसमें कोई भाव नहीं थे. दहशत हर जगह थी. सड़क पर. होटलों में. सड़क पर गश्त करती पुलिस जिप्सी के टोही दलों के चेहरों पर. मुंबई में उसे सब कुछ दिया था. बान्द्रा में बंगला. सुपर स्टार का दर्जा. 100 करोड़ के देश में पच्चीस साल से ज्यादा तक जिस आदमी को लोग भगवान समझ रहे थे, उसका प्यार. उनके प्यार पर फ़िल्म तक बनी थी. लोग कहते थे कि उसकी घड़ी उलटी घूम रही है. जब वह मुंबई आई थी, तब वह बहुत ही बौड़म, भौंडी, बेतरतीब और एक हद तक बचकानी भी थी. पर अब वह सिर्फ़ खूबसूरत ही नहीं, गरिमा और लावण्य की प्रतीक भी बन गई थी. मुंबई ने उसे एक्टिंग सिखाई और भीड़ से एक अलग दर्जा दिया. पर उस दिन जब वह ताज होटल से अपने घर जाने के लिए निकली तो कार का ड्राईवर आवाज़ देने पर भी नहीं आया. शायद वह जान बचाकर भाग गया था. फ़ोन लगा नहीं. उसे लगा कि वह सड़क से टैक्सी ले लेगी. दूर तक टैक्सी नहीं थी. जो थी, वे तेजी से निकल रही थी. उसके लिए कोई रुक नहीं रहा था. उसे पहली बार लगा वह अकेली है. उसका चेहरा न कोई देख पा रहा था, न पढ़. उसने अपने पर्स से छोटा आईना निकाल कर देखा, तो दंग रह गई. उसका चेहरा गायब हो चुका था. उसे लगा ये उसी दहशत का हिस्सा है, जिसके कारण उसकी पुरानी फिल्मों के जोडीदार हीरो को उस रात मुंबई में भरी पिस्तौल के साथ सोना पड़ा था. उसे मुजाहिदीन हो चले वक्त में वह खोखली जगह याद आई, जो बामियान में बुद्ध की प्रतिमाएँ उड़ाने के बाद रह गई थीं. उसे समझ में नहीं आया कि वह उस शाम मुंबई में अपना चेहरा ढूंढें या फिर जान बचाकर उसी तरह भागे जैसा भरी पिस्तौल के साथ सोना होता है.

3 comments:

Anonymous said...

self loss can not be more dangerous than this... excellent...

Nasiruddin said...

भाई अजगर साहब, आपका जवाब नहीं। दहशत का ऐसा वर्णन- किसी लाइव टेलीकास्‍ट ने भी नहीं किया था।

neha said...

nice....