
एक दिन वे इतने करीब हो गये कि एक दूसरे के सपनों में भी आने और जाने लगे. जब उसे सपने में कोई पीट रहा था, तो सपने की सुरंग से सपने में ही जाकर उसने उसे बचाने की कोशिश की. जब उसके सपने में रेलगाड़ी पटरी से उतर कर एक मोटी दीवार से जा टकराने वाली ही थी, तब वह दौड़ी, अपने सपने की सुरंग से उसके सपने में और जाकर जंजीर खींच दी. सपने में कई बार यादें वक्त़ के फर्श से उखड़ कर आने लगतीं. कई बार ये भी काफी होता कि दोनों के सपनों के बीच सुरंग है, एक चोर रास्ते की तरह दोनों के रहस्य, दोनों का अचेतन आपस में बात कर सकते हैं.. सच में जो मुमकिन नहीं था, उसका खतरा सपने में था, पर अब सपना पसीने से भीगते हुए एक बिना दरवाजे वाले सिनेमाघर में नहीं देखा जा रहा था, बल्कि सपने में अगर परेशानी थी, तो आवाज़ लगाकर दूसरे सपने से मदद आ सकती थी.
ये अपने आपमें एक बड़ी राहत की सांस थी. वे अब ठीक से सो सकते थे. अनिद्रा और दुःस्वप्नों से बाहर. वे सपनों में अकेले नहीं रहे.
फोटोः द ड्रीम ऑफ प्रोमथ्यूस - प्रेन्सियेरो /फ्लिकर से




2 comments:
I would think they got so anxious about there not being enough space- even in dreams- that they got insomnia.
But then this is a love story.
I like it without horror and twists.
Thank you.
इस प्यारी सी कहानी के साथ आपने जो सोचा फोटो लगाया है वह इस कहानी को एक नया आयाम देता लगता है, एक नई कहानी कहता हुआ...
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