Saturday, November 8, 2008

LOVE STORY # 480: वह नेहरू प्लेस कल जाएगी. वह आज के लिए थक चुकी है


वह सुबह चार बजे उठती है, ताकि वह प्रिंटर उठा सके, जो कोई गरीबों को दान में देना चाहता है. उसी टैक्सी में, जो उसे एयरपोर्ट छोड़ने जाएगी, उसकी स्पॉंसर्ड ट्रिप पर. इस बहाने पेट्रोल का खर्च भी बच जाएगा. वह फोन करके बताता है कि वह अपनी मंजिल पर पंहुच गया है, पर दरअसल वह जानना चाहता है कि वह प्रिंटर सचमुच काम कर रहा है और उन्हें इतनी मशक्कत के बाद भी कहीं नये प्रिंटर को खरीदने के झमेले में तो नहीं पड़ना होगा.
वह उस इस्तेमाल किये जा चुके नये प्रिंटर को देख चुकी है. उसके तार नहीं मिल रहे हैं. प्रिंटर के अंदर धूल और मकड़ी के जाले हैं. ये मशीन भी उसी कतार में शामिल होने वाली है, जिसके लिए मरम्मत वाला चाहिए. ये कतार जो तीन साल शुरू हुई थी. मशीन में कोई खराबी है, ऐसा कहना सही नहीं होगा, पर वह काम कब करेगा, कैसे कहा जा सकता है.
वह उसके लेख का अनुवाद करती रही है- जिसका प्रिंट आउट लिया जाना है और प्रकाशन के लिए भेजा जाना है और जिसे प्रकाशक ने दुबारा लिखे जाने को कहा है.
उसने देखा है अपनी मां को खान मार्केट के चक्कर खाते हुए उस जर्मन कार के पुर्जे ढूंढने के लिए जो उसके पिता को पसंद है. एक दिन जरूर उस कार की एंटीक वैल्यू होगी. तब तक नाती-पोते भी खप चुके होंगे.
अब वह नेहरू प्लेस कल जाएगी. वह आज के लिए थक चुकी है.


फोटो: जेफ़ यंगस्त्रोम

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