
वह लव मैरिज थी. जीना बिलकुल बेतरतीब था. एक बेटा है. खुद को और बच्चे को बचाने के लिए जरूरी था, शादी को तोड़ना. एक दिन वह निकल आई.
फिर बहुत साल ऐसे ही निकल गये. सबने बहुत जोर दिया और उसे भी लगा कि कब तक अपने बूढ़े होते मां बाप के भरोसे और नौकरी करते जीती रहेगी.
एक शरीफ सा उम्रदराज आदमी मिला, शादी कर ली. पर सब कुछ वैसा का वैसा तो नहीं ही होता, जैसा हमारे अरमान सोचते हों. भले शरीफ आदमी ही क्यों न हो.
एक दिन उसने फोन किया- मेरी शादी टूट रही है.
शादी बचाने के लिए उसने 43 की उम्र में मां बनने का फैसला किया.




2 comments:
पर सब कुछ वैसा का वैसा तो नहीं ही होता, जैसा हमारे अरमान सोचते हों...:(
maafi chahunga,main samajh nahin paya.vajah shayad yah ki main shuru se nahin padh paya.well..
ALOK SINGH "SAHIL"
Post a Comment