
तीन साल पहले ही वह मुम्बई आया था किसी काम से। कुछ ही समय पहले उसके पिता नहीं रहे थे। वह बड़ा बेटा था। मुम्बई में उस बरस बादल फट पड़े थे। चेरापूंजी से ज्यादा बारिश हुई थी। एक दिन उसे गाय के लिए रोटी निकालनी थी। वह रोटी पर घी और चीनी चुपड़कर निकल पड़ा बारिश में गाय ढूंढने। प्रभादेवी में तब हवा तेज थी और छाता उड़ा जा रहा था। रोटी प्लास्टिक की थैली में लिपटी हुई थी। वह इस कस्बाई यकीन से बाहर निकला था कि नुक्कड़ के पास जहां भी लोग कचरा फेंकते होंगे, गाय मिल ही जाएगी। पर गाय कहीं नहीं थी। अनजान शहर के अजनबियों से वह पूछता कि गाय कहां मिलेगी, कोई कहता इधर जाओ, दरिया किनारे खड़ी रहती हैं गाय। वह समंदर के किनारे गाय ढूंढने गया। नहीं मिली। सिद्धिविनायक मंदिर के आसपास भी नहीं। प्रभादेवी मंदिर पर भी नहीं। गाय कही नहीं। उसे लगा कि गाय नहीं मिली तो उसे दिवंगत पिता भूखे रह जाएंगे। वह भटकता रहा। पान वालों से, दुकान वालों से पूछता रहा, गाय कहां मिलेगी। वह खाली पेट था और काम पर जाने का समय भी बीता जा रहा था। उसने एक टैक्सी वाले से पूछा। उसने बोला गाय तो यहां हर कहीं मिल जाती हैं। उसने कहा तो ले चलो मुझे वहां। टैक्सी वाला भी बड़े यकीन से उस बिल्डिंग के पीछे, इस कूड़े घर के पास ले गया, जहां उसने गाय हमेशा देखी थीं। आज कहीं गाय नहीं थी। टैक्सी ड्राइवर ने पूछा क्यों बहुत जरूरी है क्या। उसने कहा हां, पिताजी के लिए रोटी निकालनी है। टैक्सी ड्राइवर ने फिर कुछ नहीं पूछा। वह लोगों से खुद ही पूछने लगा कि कहीं गाय देखी है। लोग बोलते इतनी बारिश में कहां ढूंढने निकले हो गाय। ड्राइवर कहता कि आप समझ ही नहीं रहे, जरूरी है भाई। गली गली घूमते हुए फिर वे दादर आ गये। बारिश में कई रास्ते बंद। कई जगह गाड़ियां फंसी हुई। वहां एक जैन मंदिर के बाहर बोरा लपेटे हुए दूर से दो बछड़े दिखलाई दिए। वे एक औरत के साथ थे। उसके एक हाथ में घास थी। दूसरी में गाय और बछड़े की डोर। दोनों छोटे थे। उसने पूछा गाय को रोटी देनी है। औरत ने कहा पैसे लगेंगे। उसने बीस रूपये औरत को दिये। औरत ने गाय आगे कर दी।
एक बड़ा ही सर्रियल नजारा था। दादर, घी-चीनी से चुपड़ी रोटी, बारिश, बोरे में लिपटी गाय, पैसे मांगती औरत और वह टैक्सी वाला। पिता की याद। और ये भी कि उन्हें घी कितना पसंद था।
चलो प्रभादेवी वापस। गाड़ी में दोनों चुप रहे। प्रभादेवी पंहुचे तो उसने पूछा कितने पैसे। ड्राइवर ने कहा एक सौ साठ रूपये। उसने उसके पास जितने पैसे थे, उसे देकर बाहर निकल आया। बारिश तेज थी और सड़क पर टखने तक पानी बह रहा था।








