Saturday, April 25, 2009

LOVE STORY # 461: नदियों के बीच दूरियां थी, बहाव के बीच नहीं

(उसी मित्र की एक और कहानी)
उनके छोटे से शहर से डेन्यूब नदी बहती थी. वे दोनों डेन्यूब के किनारे ही पले-बढ़े थे. इसी नदी के किनारे वे सपनों और सच से परिचित हुए थे. किसी भी प्रेमी जोड़े की तरह उन्हें नदी अच्छी लगती थी. उन्हें कोई भी नदी अच्छी लग सकती थी लेकिन उनके पास अच्छी लगने के लिए सिर्फ़ डेन्यूब ही थी. अब नदी बहुत प्रदूषित थी लेकिन उसका अच्छापन बरक़रार था. वे जवान हो चुके थे लेकिन नदी से उनका लगाव बना हुआ था. लड़की के माँ-बाप समय के साथ बूढ़े हो गए और फिर बेरोज़गार. हंगरी जैसे देश में जीवन कठिन होता जा रहा था. बहुत संघर्ष के बाद उसने अपना शहर छोड़ने का फ़ैसला किया. डेन्यूब ने कभी कहा नहीं कि मत जाओ. लेकिन उसके प्यार ने ज़रुर कहा कि मत जाओ. उसने डेन्यूब को साक्षी मानकर अपनी कौमार्यता पहले ही उसे सौंप दी थी. लेकिन लड़की के जीवन के लिए यह कौमार्यता और प्यार से थोड़ा बड़ा सवाल था. शायद डेन्यूब से भी बड़ा. इसलिए वह वहाँ से निकल पड़ी. उसने ख़ुद को समझाया. अपने प्यार को भी समझाया कि दूरी से प्यार ख़त्म कहाँ होता है. वह टेम्स के किनारे रहने लगी. बहुत दिनों तक कोशिश करती रही कि टेम्स में कभी अपने प्यार की परछाईं देख सके. कभी वह नदी के किनारे बैठे अपने सुनहरे पलों को याद कर सके. लेकिन उसे निराशा हुई. उसे लगा कि टेम्स को थोड़ा ज़्यादा ग़ुरुर है. ऐसा होता है कि हम अपने शहर-गाँव की नदियों में अपनों को देखते हैं और उसे अपनी जीवन यात्रा का साक्षी मानते रहते हैं. नदी कभी नहीं बताती कि वह क्या सोचती है. हम धीरे-धीरे सभी नदी को एक जैसा भी मानने लगते हैं. लेकिन उसे बाद में पता चला कि सभी नदियाँ एक जैसी नहीं होतीं. डेन्यूब और टेम्स दो अलग-अलग नदियाँ हैं. उधर अपनी प्रिया से बिछुड़ने के बाद लड़के को भी डेन्यूब बदली हुई नदी लगने लगी थी. अक्सर वह नदी के किनारे बैठा रहता लेकिन अब नदी उससे बात नहीं करती थी. बहुत दिनों बाद, एक दिन, लड़की ने टेम्स के किनारे बैठे-बैठे अपने प्यार को याद किया. उस दिन संयोग से लड़का भी डेन्यूब के किनारे बैठा उसे ही याद कर रहा था. अचानक उसने देखा कि टेम्स में उसे अपने प्यार की परछाईं दिखाई दे रही है. उसे यक़ीन नहीं हुआ. उधर उसके प्यार को भी डेन्यूब में अपनी प्रिया दिखाई पड़ रही थी. यक़ीन उसे भी नहीं हुआ. दोनों के लिए यह नई अनुभूति थी. दोनों ने तय किया कि इस अनुभूति को उसकी पूरी गहराई से महसूस करना चाहिए. दो दूर देशों में, एक ही दिन, कुछ मनचलों को दो अलग-अलग नदियों के किनारे दो मोबाइल फ़ोन मिले. उनके सिमकार्ड्स अभी भी डेन्यूब और टेम्स की तली में कहीं बह रहे होंगे. उनके बीच अब संपर्क नहीं होता.
दोनों नदियाँ अब भी भली हैं.

2 comments:

bunts said...

This story is a beautiful but queer blend of old silent writings with a tinge of new age romanticism....

आशीष said...

My God! is story ko maine thin baar padi...Nadi badal kar Chambal aur ganga ho gai lekin kahani wahi thi...