Thursday, April 23, 2009

LOVE STORY # 462: उसके अरमान थे, कुछ मजबूरियां भी थीं, फिर वह सपने देखने लगी, जिन्हें टूटना ही था

(उसी मित्र की भेजी गई एक और कहानी)
वह बहुत ख़ूबसूरत नहीं थी. दोहरा बदन था पर आकर्षक होने के सारे तत्व मौजूद थे. उसे शहर में बहुत से लोग जानते थे. क्यों जानते थे यह बहुत रहस्य की बात नहीं थी. ठीक उसी तरह जिस तरह वासवदत्ता और वसंतसेना की ख्याति रहस्य की बात नहीं थी. ये और बात है कि लोग कहते हैं कि वासवदत्ता और वसंतसेना बला की ख़ूबसूरत थीं. लेकिन ख़ूबसूरती जैसी दुनियावी चीज़ अक्सर दिल और जिस्म के मामलों में बेईमान हो जाती है.
वह जो करती थी वैसा करने के लिए उसके पास अपने तर्क थे. बेरोज़गार, बुज़ुर्ग और विधुर पिता, दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई और वह अकेली कमाने वाली आदि-आदि. उसके पास नौकरी भी थी लेकिन इसी नौकरी ने उसे दूसरा रास्ता भी दिखाया था. उसे इस रास्ते में डालने वाला शहर का एक बड़ा सेठ था.
जो धंधा करते हैं वो जानते हैं कि धंधे में दिल का मामला ख़तरनाक होता है. टाटा, बिड़ला से लेकर मित्तलों और अंबानियों तक यह बात सबको याद रहती है. वासवदत्ता, वसंतसेना से लेकर सुंदरीबाई, मुन्नीबाई और इस लड़की तक को यह बात ठीक से पता थी. लेकिन इतिहास गवाह है कि वसंतसेना ने भी ग़लती की थी और मैं गवाह हूँ कि इस लड़की से भी ग़लती हुई.
वह अब तक पैसों पर सोती आई थी. लेकिन इस बार उसे किसी ने सपनों के बिछौने पर सुला दिया था. पैसा जागने पर बचा रहता था लेकिन सपना, जैसा कि हर सपने के साथ होता है, जागने पर टूट चुका था.
अब कई बरस बीत गए पर उसके सपनों के टूटने की कंपन अभी भी अक्सर महसूस होती है. ख़ासकर उस लड़के के दिल में जो न तब रो सका था और न अब रो सकता है. लड़की पता नहीं अब कहाँ है.

3 comments:

vandana said...

bahut hi sundar!

bunts said...

ek lambey arsey baad soyi padi samvednayo mein kuch halchal hui...andar ka ajgar kuch jaaga! Isey padh mujhey Yashpaal krut "Manushya key roop" upanyaas key paatra yaad aa gaye....EK LOMHARSHAK VARNAN!

रंगनाथ सिंह said...

मार्मिक !!