तानाशाह ने सिर्फ बरमूडा पहन रखा था जब उसकी नींद खुली. तानाशाह फर्श पर सो रहा था. गर्मी थी. पंखा चल रहा था. तानाशाह घर में अकेला था. तानाशाह ने रात में शराब पी थी, जिसकी बोतल पर ओल्ड मॉंक लिखा हुआ था और जिसके करीब नमकीन की प्लेट और मुर्गे की हड्डियां पड़ी हुई थी. पास में एक डायरी थी जिसमें तानाशाह की दर्द भरी शायरी थी. तानाशाह का अपने दिल को लेकर भयानक मुलायम और दुनिया को लेकर काफी सख्त रवैया था. तानाशाह मोटा, बेढब और क्रांतिकारियों की तरह की मूंछो वाला था. तानाशाह तानाशाहों की किताबें पढ़ता था और अपनी तानाशाही और उनकी तानाशाही से तुलना करते हुए खुद को हमेशा तैयार रखता था कि पता नहीं कब तानाशाह को इतिहास आवाज दे कि दरबार लग गया है, महराज. तानाशाह का बचपन बाकी तानाशाहों की तरह ही तकलीफ वाला था, और बाकी तानाशाहों की तरह ही वह उस तकलीफ को बांट नहीं सका था. तानाशाह शीशे के सामने या बाथरूम में खुद को एक भयानक गौरवशाली मुद्रा में एक आलीशान तानाशाह की तरह खड़ा होने की प्रैक्टिस करता था. तानाशाह को उन कौवों और कबूतरों से सख्त नफरत थी, जो बाकी तानाशाहों के बुतों का इस्तेमाल सुलभ शौचालय की तरह करते थे. वह तानाशाहों की सीक्रेट कौवा कबूतर भगाओ कमेटी का मानद सदस्य था. तानाशाह ने बाहर जाकर अखबार उठाये, सिगरेट जलाई, कॉफी का घूंट लिया और पहले पन्ने की खबरों को तानाशाही सरसरी के साथ देखा जबकि उसके मुंह में सिगरेट और कॉफी की कड़ुवाहट घूम रही थी. जब उसे पता चला कि उसे प्यार हो गया है और उसके प्यार ने जिस औरत को चुना है, वह शादीशुदा और बाल बच्चेदार है, तब से तानाशाह और ज्यादा अकेला और ज्यादा क्रूर और ज्यादा ओल्ड मॉंक, और ज्यादा कड़ुवी कॉफी, और ज्यादा सिगरेटें पीने लगा था. न सिर्फ टूटे हुए दिल को संभालने के लिए, बल्कि एक अच्छे तानाशाह होने के लिए भी ये जरूरी था. तानाशाह के चेहरे पर तबाही का वह मंजर देखा जा सकता था, जिसका अंदाजा मरी हुई बिल्ली की तरह ढुलमुल तकिये में सोखी गई आंसू और पसीने की नमी से लगाया जा सकता था. तानाशाह को डरावने सपने आते थे. और वह कई बार खुद को सपने में एसेसिनेट होता हुआ देख चुका था. एक बार उसके अपने कुत्ते उसे नोंच कर खा गये थे, ऐसा एक सपने में आया था मार्क्वेज के लिखे एक किस्से की तरह. उस शादीशुदा और बाल बच्चेदार औरत को नहीं पता था कि तानाशाह के तंगदिल होने में उसकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है. तानाशाह की सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि उसकी तकलीफ समझने वाला कोई नहीं था. थे भी तो उसकी तानाशाही ही उसमें आड़े आ गई.तभी तानाशाह की काम वाली आ गई. तानाशाह ने वर्ल्ड स्पेस सैटेलाइट रेडियो में लेटिन म्यूजिक का चैनल लगाया और कामवाली से कहा- मेरे साथ नाचो.
मुंह बिचका कर कामवाली ने उसका एक और गिलास तोड़ दिया.
तानाशाह इतिहास की अगली पुकार का इंतजार करने लगा. तब तक उसका गणतंत्र उसका बाथरूम ही था.




10 comments:
" interesting story to read.."
Regards
कतई सच... तानाशाही में औरतें ही आड़े आती रही हैं...
OOnche Log OOnchee pasand--OLD MONK! VO cigarette kaunsi peeta hai?
गोया की दिलचस्प तानाशाही रही.....
"तानाशाह का अपने दिल को लेकर भयानक मुलायम और दुनिया को लेकर काफी सख्त रवैया था." बड़ा दिलचस्प है ये तानाशाह!
कामवाली यदि तानाशाह का गिलास तोड़ दे तो उसकी तानाशाही पर कुछ लिखने की जरुरत नहीं।
Sab kuchh itana saaf -saaf dekh paana........ kam log hi kar paate honge .
कामवाली ही इस तानाशाह को सही रास्ते पर ला सकती है। जबरदस्त कहानी है तानाशाह की।
waiting for new post---a reader!
nayi post kab milegi???????/
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