Friday, April 3, 2009

LOVE STORY # 466: आईने में जितना दिख रहा है, हक़ीकत उससे ज्यादा करीब है


तुम उसे नहीं जानते थे. पर एक लाल बत्ती पर तुम्हारी कार रुकी तो तुमने अपने रियर व्यू मिरर में पीछे वाली कार को चला रहे आदमी को देखा. तुम्हारी तरह वह भी दफ्तर जा रहा है. उसकी कमीज़ बुर्राक सफ़ेद है और टाई गुलाबी. वह बिल्कुल सजा धजा और तरोताज़ा लग रहा था. तुमने अपनी कार में रेडियो की आवाज़ तेज कर दी और रेडियो जॉकी निइइशा को इस बात की इजाज़त दी कि वह तुम्हारा ध्यान बंटा सके. बाहर भी शोर था, पर कार के बंद शीशों ने उन्हें रोक रखा था. बाहर ट्रैफिक है रेंगता हुआ एक लाल बत्ती पर कई बार रुकता हुआ. अख़बार, फिर गजरा, फिर कार साफ करने का कपड़ा बेचने वाले भिखारीनुमा लोग एक के बाद एक तुम्हारे कांच पर हाथ रख कर जा चुके हैं. तुम्हें लग रहा है कि तुम्हें देर हो रही है. तुम फिर उसे देखते हो उस गुलाबी टाई वाले आदमी को. और चौंक जाते हो. पर तभी बत्ती हरी हो जाती है. तुम सामने देखने लगते हो. गाड़ी आगे बढ़ती है. तुम देखते हो धीरे से गुलाबी टाई वाला आदमी अपनी कार को तुम्हारे पीछे लगा लेता है. अगला चौराहे पर फिर लाल बत्ती है. तुम गुलाबी टाई वाले आदमी की तरफ देखना नहीं चाहते. कम से कम इस तरह से नहीं कि उसे लगे कि तुम उसे देख रहे हो. तुम घड़ी देखते हो और खुद से कहते हो कि आज फिर देर से दफ्तर पंहुचोगे. अगले मोड़ पर गुलाबी टाई वाले की कार बांये घूम जाती है और तुम सीधे अपने दफ्तर के रास्ते. काम, फोन, ईमेल, लंच, गपशप और घर लौटना. बीच में निइइशा.
गुलाबी टाई वाला तुम्हारी ज़िंदगी से जा चुका है. अपनी दुनिया में होगा कहीं.
अगले दिन जब उसी चौराहे पर लाल बत्ती, रेंगता रुकता ट्रैफिक, एक के बाद एक सामान बेचते भिखारी.. तब तुम्हें यकायक गुलाबी टाई वाले आदमी की याद आती है.
तुम बिना उसकी तरफ देखे, बिना उससे पूछे, बिना ये जताये कि तुम कितने ज्यादा उत्सुक हो ये जानना चाहते हो कि गुलाबी टाई पहने हुए वह आदमी इतनी बेसाख्ता रो क्यों रहा था. तुम उसे नहीं जानते थे, पर उसकी कार, उसकी कमीज़, उसके तरोताज़ा चेहरे, उसके संभावित आफ्टर शेव को तुम ठीक वैसे ही जानते थे, जैसे खुद को. क्या कोई बीमार था? कोई नहीं रहा जिंदगी या दुनिया में? क्या कोई धोखा हो गया? पैसा? बेदखली? और क्या वजह रही होगी, तुम सोचते हो अख़बारों, टीवी सीरियल्स की सुर्खियों के बीच दिमाग का गूगल करते हुए.
कई बार रोने के लिए कोई भी जगह काफी नहीं होती, चौराहों की लाल बत्ती भी नहीं. क्या दुख से ज्यादा भयानक तकलीफ यह है कि रोने की कोई सही जगह का न होना. तुम्हें उस खबरनवीस की याद आती है, जिसने खुदकुशी से पहले अपने तमाम दोस्तों को फोन किया, और कहा सब ठीक है बॉस.
रेडियो जॉकी निइइशा भयानक बकर करती रहती है. घर से दफ्तर तक का एक घंटा निइइशा उसकी हमसफर है. वह इतनी बकवास के बाद भी इतने सारे लवसांग्स सुनाती है, कि एक दिन तुम निइइशा से बेपनाह मुहब्बत करने लगोगे बीवी बच्चों का मोह छोड़ कर. निइइशा की समदृष्टि कुछ इस तरह की है कि हिमेश रेशमिया (जो मुंह से नहीं गाता) से लेकर ब्रायन एडम्स (जो फटे बांस से गले से गज़ब का गाता है) के प्रति समान श्रद्धा रखती है. निइइशा तुम्हारी कार में चल रहे प्राइवेट मुजरे का आइटम है.
तुम सोचते हो निइइशा की शक्ल कैसी होगी.
तुम सोचते हो पिछली बार तुमने गुलाबी टाई कब पहनी थी. तुम कब रोए थे पिछली बार. तुम्हें जो दुःख सालते हैं कई बार बरसों बाद भी, तुम्हारे जहन में तैरते हैं.
तुम रियर व्यू मिरर में झांकते हो. वहां तुम्हारी शक्ल है. तुम अपना चेहरा साफ करते हो.
photo: deansouglass/ flickr

4 comments:

Khali Dimagh said...

गुलाबी टाई वाला आदमी को हम सब जानते हैं...क्योंकि वह हममें से किसी न किसी की किताब का बिखरा हुआ पेज है...

आशीष said...

मेरी जिंदगी से गुलाबी टाई वाला आदमी खो चुका है।

अनिल कान्त : said...

मन की अंतर्ध्वनि ऐसी ही होती है

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

संगीता मनराल said...

Aaj Pahli baar pada apko... bahut khub likhte hain aap...